Jane Chhat Mahaparv Ka Adhyatmik Rahashya

Jane Chhat Mahaparv Ka Adhyatmik Rahashya

प्रवेश निःशुल्क

दो गज की दुरी
मास्क पहनना है जरुरी

आमंत्रण

छठ पर्व की शुभकामनाएं

अवश्य पधारें

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

जानें छठ महापर्व का आध्यात्मिक रहस्य
बुधवार, 18 नवम्बर
संध्या 5 बजे
मो. 9334016268

बी – 10 & 12
डॉक्टर्स कॉलोनी जगजीवन नगर धनबाद

बीके कमला दीदी
सब-जोन इंचार्ज
श्याम नगर, कोलकाता

बीके अनु दीदी
केंद्र संचालिका
धनबाद

शुद्धता ही महानता हैं।

छठ महापर्व पर विशेष

सबसे बड़ी पूंजी हैं पवित्रता

ज्ञान सूर्य प्रगटा
अज्ञान अंधकार मिटा

Jane Chhat Mahaparv Ka Adhyatmik Rahashya

जानें कौन हैं छठी मैया जिनकी छठ पूजा के दौरान की जाती हैं उपासना !
जानें आस्था का महापर्व छठ मनोकामना पूर्ण करनेवाला व्रत क्यों हैं !
जानें प्रत्यक्ष देव सूर्य को अपने अच्छे कर्मों का साक्षी कैसे बनायें !

प्रवेश हेतु ये कार्ड साथ अवश्य लाएं।
समस्त कार्यक्रम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के कोरोना महामारी के फैलाव
से बचाव एवं उचित स्वास्थ प्रबंधन के दिशानिर्देशों के अनुरूप संचालित होगा।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरुरी

Facebook Event Link

https://www.facebook.com/events/930983877430935

We will shortlist and confirm the registration.

Selection On the Basis of First Come First Serve

रजिस्ट्रेशन करने के लिए यहाँ फॉर्म भरें

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSfh1PidGiNpUGKlqpLJAMyWtEe07nQvPvabCpv5amf-1TOlmg/viewform

Update On Program

Sharing some photographs of the program:

छठ पूजा का आध्यात्मिक महत्तव Anu Didi Brahma Kumaris Dhanbad

Happy Rakshabandhan

Happy Rakshabandhan

Let us tie the pure thread of Rakhi with the remembrance of our most beloved BapDada. Let us spread spiritual fragrance of purity, peace and happiness in the society.

Happy Rakshabandhan

Happy Rakshabandhan
Happy Rakshabandhan

84 वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव – जाने श्रेष्ठ शास्त्र शिव पुराण का सार – ब्रह्माकुमारीज की प्रस्तुति

84 वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव – जाने श्रेष्ठ शास्त्र शिव पुराण का सार

ब्रह्माकुमारीज की प्रस्तुति – हम सब पार्वती

हमारे वंदनीय देवी-देवताभगवान को ज्योतिर्लिंगम के रूप में क्यों प्रकट होना पड़ा? महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर

अवश्य पधारें प्रवेश निःशुल्क

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
Sunday – 23 February, 2020, Time – 5 to 7 pm
B-12, Doctor’s Colony, Jagjivan Nager, Saraidhela

Mob : 9334016268
विशेष राजयोग प्रशिक्षण शिविर 24 फ़रवरी से 1 मार्च प्रातः – 7-8 am संध्या – 6-7 pm

प्रवेश निःशुल्क

BK Kamla Didi
Sub-Zone Incharge
Shyam Nager, Kolkata

BK Anu Didi
Centre Incharge
Dhanbad

Garud Samvad – गरुड़ संवाद – मृत्यु के बाद क्या ?

गरुड़ संवाद
मृत्यु के बाद क्या ?
प्राप्त करें चौंकाने वाली अद्भुत जानकारी
अवश्य पधारें

Life After Death

रविवार, 3 नवम्बर
संध्या 5 बजे

पायें गरुड़ पुराण के श्रवण का पुण्य

स्थान – प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय
बी-12 डॉक्टर्स कॉलोनी, जगजीवन नगर, सरायढेला, धनबाद
मो. – 9334016268

Life After Death

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https://www.facebook.com/events/399909100947268/

नारी सशक्तिकरण के लिए आत्म-ज्ञान – आजीविका सरस मेला 2019

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने आजीविका सरस मेला 2019, गोल्फ ग्राउंड, धनबाद में नारी सशक्तिकरण के लिए आत्म-ज्ञान प्रदर्शनी लगाया |

नारी सशक्तिकरण के लिए आत्म-ज्ञान - आजीविका सरस मेला 2019
नारी सशक्तिकरण के लिए आत्म-ज्ञान – आजीविका सरस मेला 2019, Dhanbad

मेले में ब्रह्मा कुमारीज के भाई-बहनो ने प्रदर्शनी के माध्यम से भारत के उथान-पतन के बारे में समझाया |

श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष – अनु दीदी

 श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष - अनु दीदी
श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष – अनु दीदी

श्री कृष्णा जन्माष्टमी पर विशेष
श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये?

जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्णा के भक्त उनकी झांकियां तैयार करते हैं और रथ पर उन झांकियों को नगर में घुमाते हैं | श्री कृष्णा अपने चित्रों तथा मंदिरों में सदैव प्रभामंडल अर्थात प्रकाश के ताज से सुशोभित तथा रत्नजड़ित स्वर्णमुकुट से भी सुसज्जित दिखाई देते हैं, इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव हमें धार्मिक और राजनितिक दोनों सत्ताओ की पराकाष्ठा को प्राप्त श्रीकृष्ण देवता की याद दिलाता हैं, यह उत्सव इस दृष्टिकोण से अनुपम है कि श्रीकृष्ण को भारत के राजा भी पूजते हैं और महात्मा भी महान एवं पूज्य मानते हैं, ध्यान देने योग्य बात यह हैं कि जो भी दूसरे व्यक्ति प्रसिद्ध हुए हैं, जिनके जन्मदिन सार्वजनिक उत्सव बन गए हैं, वे कोई जनम से ही महान या पूज्य नहीं थे |

श्री कृष्णा की यह विशेषता हैं कि वे जन्म से ही पूज्य पदवी को प्राप्त थे, उनकी किशोरावस्था के चित्रों में भी वे दोनों ताजों से सुशोभित हैं | उनकी बाल्यावस्था के जो चित्र मिलते हैं, उनमे भी वो मोर पंख, मणिजड़ित आभूषण तथा प्रभामंडल से युक्त देखे जाते हैं | उनकी बाल्यावस्था की झांकियां लोग बहुत चाव और सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, श्रीकृष्ण में शारीरिक आरोग्यता और सुंदरता की, आत्मिक बल और पवित्रता की तथा दिव्या गुणों की पराकाष्ठा थी या यूँ कहें कि मनुष्य चोले में जो सर्वोत्तम जन्म हो सकता हैं, वह उनका था |

अन्य कोई भी व्यक्ति शारीरिक व आत्मिक दोनों दृषिकोणों से इतना सूंदर, आकर्षक, प्रभावशाली और प्रभुत्वशाली नहीं हुआ हैं |

श्रीकृष्ण के मंदिरों में हर प्रकार से स्वच्छता बरती जाती हैं, श्रीकृष्ण को तो अशुद्ध हाथ छू तक भी नहीं सकते, अतः श्रीकृष्ण का आप लाख बार आवाह्न कीजिये परन्तु जब तक नर-नारी का मन मंदिर नहीं बना हैं, जब तक मन ज्ञान द्वारा आलोकित नहीं हुआ हैं, तब तक श्रीकृष्ण जो कि देवताओं में भी श्रेष्ठ और शिरोमणि हैं, यहाँ नहीं आ सकते, आज लोग अपने संस्कारों को नहीं बदलते और अपने जीवन को पवित्र नहीं बनाते, श्रीकृष्ण का केवल आवाह्न मात्रा कर छोड़ देते हैं, परन्तु सोचने कि बात हैं कि क्या श्रीकृष्ण आज के वातावरण में जन्म ले सकते हैं?

आज तो संसार में तमोगुण की प्रधानता हैं और सभी में काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार का प्राबल्य हैं, ऐसे लोगो के बीच क्या श्रीकृष्ण पधार सकते हैं? निःसंदेह श्रीकृष्ण थे तो जन्म से ही महान परन्तु उन्हें भगवान कहता गलती हैं | श्री कृष्ण तो भगवान की सर्वोत्तम रचना हैं, और उनका चित्र देखकर उनके रचियता भगवान शिव की याद आनी चाहिए, आज लोग श्रीकृष्ण का गायन – पूजन तो करते हैं, उनकी महानता का बखान भी करते हैं, परन्तु जिस सर्वोत्तम पुरुषार्थ से उन्होंने वह महानता प्राप्त की थी और पद्मो-तुल्य जीवन बनाया था, उस पुरुषार्थ पर वे धयान नहीं देते, वे ये नहीं समझते कि श्रीकृष्ण हमारे मान्य पूर्वज थे, अतएव हमारा कर्त्तव्य है कि हम उनके उच्च जीवन से प्रेरणा लेकर आपने जीवन भी वैसा उच्च बनाने को यथार्थ पुरुषार्थ करें.

अनु दीदी – लेखिका
संचालिका
(प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय – धनबाद केंद्र)

रक्षाबंधन का सन्देश – पवित्र बनो – योगी बनो

रक्षाबंधन का सन्देश - पवित्र बनो - योगी बनो article- by anu didi

रक्षाबंधन का सन्देश – पवित्र बनो, योगी बनो!

अनु दीदी –
रक्षाबंधन एक विलक्षण त्यौहार हैं, क्योकि मनुष्य को स्वभाव से ही कोई बंधन अच्छा नहीं लगता, फिर भी रक्षाबंधन बड़ी ख़ुशी से बांधा और बंधवाया जाता हैं | प्रचलित प्रथा के अनुसार राखी एक बड़ी बहन अपने नन्हे भाई को, एक धनवान बहन अपने गरीब भाई को, परदेश में रहने वाली बहन अपने दूर देशीय भाई को तथा अनेक बहने अपने इकलौते भाई को भी बांधती अथवा भेजती हैं |

इन परिस्थिति में भाई द्वारा बहन की आर्थिक सहायता अथवा लाज की रक्षा की भी अपनी सीमाएं हैं, ऐतिहासिक दृष्टि से भी राखी की प्रचलित रश्म परंपरागत नहीं लगती, भला यह मानना कहाँ तक उचित होगा कि नारी आदि काल से अबला रही हैं? विचार करे कि दुर्गा, अम्बा, काली इत्यादि शक्तियां, जिनसे भक्त जन आज तक सुरक्षा की कामनाएं करते हैं, उन्हें भला किसके संरक्षण की आवश्यकता रही होगी? सृष्टि के आदि अर्थात सतयुग में न तो धन-संपत्ति की कमी थी और न ही नारी की लाज को कोई खतरा था, नर और नारी दोनों के अधिकार सामान थे और इस बराबरी के स्मरण चिन्ह आज भी उन मूर्तियों और चित्रों के रूप में मिलते हैं जिनमे विश्व महाराजन श्री नारायण और विश्व महारानी श्री लक्ष्मी को एक सिंहासन पर एक साथ विराजमान दिखते हैं | ‘यथा राजा तथा प्रजा’ की उक्ति के अनुसार उस काल की सभी नारियां सम्मानित तथा सुरक्षित थी | इससे स्पष्ट होता है कि रक्षाबंधन केवल शारीरिक नाते के भाई-बहन का त्यौहार नहीं हैं, बल्कि इसका भावार्थ कहीं अधिक विस्तृत हैं | देखा जाये तो इस पर्व को मानाने के लिए यह काफी बदला हुआ और सिमित सा रूप हैं | पुरोहितो अथवा ब्राह्मणो द्वारा अपने यजमानो को राखी बांधकर तिलक लगाने कि प्रथा प्रचलित हैं | ब्राह्मण भी इस अवसर पर यजमानो को राखी बांधते हैं | परन्तु उनमे यजमानो द्वारा उनकी रक्षा का भाव नहीं हैं | राखी के विषय में एक शास्त्र कथा तो यह हैं कि यम ने अपनी बहन यमुना से राखी बंधवाते हुए ये कहा था कि इस पवित्रता के बंधन में बंधने वाला यमदूतों के भय से छूट जाएगा, एक अन्य कथा के अनुसार जब देवराज इंद्र अपना दैवी स्वराज्य हर गए थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी इन्द्राणी से रक्षा सूत्र बंधवाया, जिससे उनका खोया हुआ स्वराज्य पुनः प्राप्त हो गया था | तो स्पष्ट है कि राखी का इतना कोई ऊंच भाव होगा, ये सभी बातें इस सत्यता को घोतक हैं कि रक्षा बंधन एक धार्मिक उत्सव हैं जिसका सम्बन्ध जीवन में श्रेष्ठता एवं निर्विकारिता से हैं | रक्षा बंधन हमें आत्मिक दृष्टि अपनाने अर्थात सबको स्थूल दृष्टि से स्त्री व पुरष न देखकर आत्मा अर्थात भाई-भाई समझने कि प्रेरणा देता हैं | इस सात्विक दृष्टि वृति के लिए पवित्रता का पालन आवश्यक हैं | पवित्रता के द्वारा ही हम भाई-बहन के पावन सम्बन्ध को वास्तविक और व्यापक स्वरुप प्रदान कर सकते हैं तथा सच्चे देवपद के अधिकारी बन सकते हैं | उस सदाशिव परमात्मा तक पहुंचने के लिए पवित्रता ही एकमात्र सोपान हैं | पवित्रता ही सुख-शांति और समृद्धि की जननी हैं | अतः रक्षाबंधन का सन्देश हैं – पवित्र बनो, योगी बनो ! काम वासना एक भयंकर विष हैं जिसे पवित्रता और ब्रह्मचर्य के द्वारा जीता जा सकता हैं | रक्षा बंधन मर्यादा और आत्म निग्रह द्वारा मृत्यु पर विजय पाने का पर्व हैं | (अनु दीदी जी – लेखिका, प्रजापिता ब्रहकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, धनबाद केंद्र की संचालिका हैं)