श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष – अनु दीदी

 श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष - अनु दीदी
श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये? जन्माष्टमी पर विशेष – अनु दीदी

श्री कृष्णा जन्माष्टमी पर विशेष
श्री कृष्णा का आवाह्न कैसे किया जाये?

जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्णा के भक्त उनकी झांकियां तैयार करते हैं और रथ पर उन झांकियों को नगर में घुमाते हैं | श्री कृष्णा अपने चित्रों तथा मंदिरों में सदैव प्रभामंडल अर्थात प्रकाश के ताज से सुशोभित तथा रत्नजड़ित स्वर्णमुकुट से भी सुसज्जित दिखाई देते हैं, इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव हमें धार्मिक और राजनितिक दोनों सत्ताओ की पराकाष्ठा को प्राप्त श्रीकृष्ण देवता की याद दिलाता हैं, यह उत्सव इस दृष्टिकोण से अनुपम है कि श्रीकृष्ण को भारत के राजा भी पूजते हैं और महात्मा भी महान एवं पूज्य मानते हैं, ध्यान देने योग्य बात यह हैं कि जो भी दूसरे व्यक्ति प्रसिद्ध हुए हैं, जिनके जन्मदिन सार्वजनिक उत्सव बन गए हैं, वे कोई जनम से ही महान या पूज्य नहीं थे |

श्री कृष्णा की यह विशेषता हैं कि वे जन्म से ही पूज्य पदवी को प्राप्त थे, उनकी किशोरावस्था के चित्रों में भी वे दोनों ताजों से सुशोभित हैं | उनकी बाल्यावस्था के जो चित्र मिलते हैं, उनमे भी वो मोर पंख, मणिजड़ित आभूषण तथा प्रभामंडल से युक्त देखे जाते हैं | उनकी बाल्यावस्था की झांकियां लोग बहुत चाव और सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, श्रीकृष्ण में शारीरिक आरोग्यता और सुंदरता की, आत्मिक बल और पवित्रता की तथा दिव्या गुणों की पराकाष्ठा थी या यूँ कहें कि मनुष्य चोले में जो सर्वोत्तम जन्म हो सकता हैं, वह उनका था |

अन्य कोई भी व्यक्ति शारीरिक व आत्मिक दोनों दृषिकोणों से इतना सूंदर, आकर्षक, प्रभावशाली और प्रभुत्वशाली नहीं हुआ हैं |

श्रीकृष्ण के मंदिरों में हर प्रकार से स्वच्छता बरती जाती हैं, श्रीकृष्ण को तो अशुद्ध हाथ छू तक भी नहीं सकते, अतः श्रीकृष्ण का आप लाख बार आवाह्न कीजिये परन्तु जब तक नर-नारी का मन मंदिर नहीं बना हैं, जब तक मन ज्ञान द्वारा आलोकित नहीं हुआ हैं, तब तक श्रीकृष्ण जो कि देवताओं में भी श्रेष्ठ और शिरोमणि हैं, यहाँ नहीं आ सकते, आज लोग अपने संस्कारों को नहीं बदलते और अपने जीवन को पवित्र नहीं बनाते, श्रीकृष्ण का केवल आवाह्न मात्रा कर छोड़ देते हैं, परन्तु सोचने कि बात हैं कि क्या श्रीकृष्ण आज के वातावरण में जन्म ले सकते हैं?

आज तो संसार में तमोगुण की प्रधानता हैं और सभी में काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार का प्राबल्य हैं, ऐसे लोगो के बीच क्या श्रीकृष्ण पधार सकते हैं? निःसंदेह श्रीकृष्ण थे तो जन्म से ही महान परन्तु उन्हें भगवान कहता गलती हैं | श्री कृष्ण तो भगवान की सर्वोत्तम रचना हैं, और उनका चित्र देखकर उनके रचियता भगवान शिव की याद आनी चाहिए, आज लोग श्रीकृष्ण का गायन – पूजन तो करते हैं, उनकी महानता का बखान भी करते हैं, परन्तु जिस सर्वोत्तम पुरुषार्थ से उन्होंने वह महानता प्राप्त की थी और पद्मो-तुल्य जीवन बनाया था, उस पुरुषार्थ पर वे धयान नहीं देते, वे ये नहीं समझते कि श्रीकृष्ण हमारे मान्य पूर्वज थे, अतएव हमारा कर्त्तव्य है कि हम उनके उच्च जीवन से प्रेरणा लेकर आपने जीवन भी वैसा उच्च बनाने को यथार्थ पुरुषार्थ करें.

अनु दीदी – लेखिका
संचालिका
(प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय – धनबाद केंद्र)

रक्षाबंधन का सन्देश – पवित्र बनो – योगी बनो

रक्षाबंधन का सन्देश - पवित्र बनो - योगी बनो article- by anu didi

रक्षाबंधन का सन्देश – पवित्र बनो, योगी बनो!

अनु दीदी –
रक्षाबंधन एक विलक्षण त्यौहार हैं, क्योकि मनुष्य को स्वभाव से ही कोई बंधन अच्छा नहीं लगता, फिर भी रक्षाबंधन बड़ी ख़ुशी से बांधा और बंधवाया जाता हैं | प्रचलित प्रथा के अनुसार राखी एक बड़ी बहन अपने नन्हे भाई को, एक धनवान बहन अपने गरीब भाई को, परदेश में रहने वाली बहन अपने दूर देशीय भाई को तथा अनेक बहने अपने इकलौते भाई को भी बांधती अथवा भेजती हैं |

इन परिस्थिति में भाई द्वारा बहन की आर्थिक सहायता अथवा लाज की रक्षा की भी अपनी सीमाएं हैं, ऐतिहासिक दृष्टि से भी राखी की प्रचलित रश्म परंपरागत नहीं लगती, भला यह मानना कहाँ तक उचित होगा कि नारी आदि काल से अबला रही हैं? विचार करे कि दुर्गा, अम्बा, काली इत्यादि शक्तियां, जिनसे भक्त जन आज तक सुरक्षा की कामनाएं करते हैं, उन्हें भला किसके संरक्षण की आवश्यकता रही होगी? सृष्टि के आदि अर्थात सतयुग में न तो धन-संपत्ति की कमी थी और न ही नारी की लाज को कोई खतरा था, नर और नारी दोनों के अधिकार सामान थे और इस बराबरी के स्मरण चिन्ह आज भी उन मूर्तियों और चित्रों के रूप में मिलते हैं जिनमे विश्व महाराजन श्री नारायण और विश्व महारानी श्री लक्ष्मी को एक सिंहासन पर एक साथ विराजमान दिखते हैं | ‘यथा राजा तथा प्रजा’ की उक्ति के अनुसार उस काल की सभी नारियां सम्मानित तथा सुरक्षित थी | इससे स्पष्ट होता है कि रक्षाबंधन केवल शारीरिक नाते के भाई-बहन का त्यौहार नहीं हैं, बल्कि इसका भावार्थ कहीं अधिक विस्तृत हैं | देखा जाये तो इस पर्व को मानाने के लिए यह काफी बदला हुआ और सिमित सा रूप हैं | पुरोहितो अथवा ब्राह्मणो द्वारा अपने यजमानो को राखी बांधकर तिलक लगाने कि प्रथा प्रचलित हैं | ब्राह्मण भी इस अवसर पर यजमानो को राखी बांधते हैं | परन्तु उनमे यजमानो द्वारा उनकी रक्षा का भाव नहीं हैं | राखी के विषय में एक शास्त्र कथा तो यह हैं कि यम ने अपनी बहन यमुना से राखी बंधवाते हुए ये कहा था कि इस पवित्रता के बंधन में बंधने वाला यमदूतों के भय से छूट जाएगा, एक अन्य कथा के अनुसार जब देवराज इंद्र अपना दैवी स्वराज्य हर गए थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी इन्द्राणी से रक्षा सूत्र बंधवाया, जिससे उनका खोया हुआ स्वराज्य पुनः प्राप्त हो गया था | तो स्पष्ट है कि राखी का इतना कोई ऊंच भाव होगा, ये सभी बातें इस सत्यता को घोतक हैं कि रक्षा बंधन एक धार्मिक उत्सव हैं जिसका सम्बन्ध जीवन में श्रेष्ठता एवं निर्विकारिता से हैं | रक्षा बंधन हमें आत्मिक दृष्टि अपनाने अर्थात सबको स्थूल दृष्टि से स्त्री व पुरष न देखकर आत्मा अर्थात भाई-भाई समझने कि प्रेरणा देता हैं | इस सात्विक दृष्टि वृति के लिए पवित्रता का पालन आवश्यक हैं | पवित्रता के द्वारा ही हम भाई-बहन के पावन सम्बन्ध को वास्तविक और व्यापक स्वरुप प्रदान कर सकते हैं तथा सच्चे देवपद के अधिकारी बन सकते हैं | उस सदाशिव परमात्मा तक पहुंचने के लिए पवित्रता ही एकमात्र सोपान हैं | पवित्रता ही सुख-शांति और समृद्धि की जननी हैं | अतः रक्षाबंधन का सन्देश हैं – पवित्र बनो, योगी बनो ! काम वासना एक भयंकर विष हैं जिसे पवित्रता और ब्रह्मचर्य के द्वारा जीता जा सकता हैं | रक्षा बंधन मर्यादा और आत्म निग्रह द्वारा मृत्यु पर विजय पाने का पर्व हैं | (अनु दीदी जी – लेखिका, प्रजापिता ब्रहकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, धनबाद केंद्र की संचालिका हैं)

Motivational Quotes Brahma Kumaris

  1. यह आँखे प्रभु का विशेष उपहार हैं | इनके द्वारा दुसरो को प्रेम, शांति व ख़ुशी का दान करो |
यह आँखे प्रभु का विशेष उपहार हैं | इनके द्वारा दुसरो को प्रेम, शांति व ख़ुशी का दान करो |

यदि आप बहुत अधिक लोगो पर निर्भर रहते हैं तो इससे आपके निराश होने के अवसर बढ़ जाते हैं |

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अपने शत्रुओं से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा उपाय हैं कि उन्हें अपना मित्र बना लीजिये |

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संपूर्ण ब्रह्मचर्य ही सम्पूर्ण अहिंसा हैं |

मुश्किलों को प्रभु-अर्पण कर दो तो, हर मुश्किल सहज हो जाएगा | – ब्रह्मा कुमारीज

मुश्किलों को प्रभु-अर्पण कर दो तो, हर मुश्किल सहज हो जाएगा | - ब्रह्मा कुमारीज

अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे |

अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे |

अगर आपको दुसरो के धंधे में मन लगाने की आदत हैं तो आपका अपने धंधे में दिवाला निकल जायेगा | – ब्रह्मा कुमारीज

परीक्षा की घडी मनुष्य को महान बनाती हैं, विजय की घडी नहीं |

परीक्षा की घडी मनुष्य को महान बनाती हैं, विजय की घडी नहीं |

जिस व्यक्ति ने प्रसंशा करना तो सीखा है परन्तु ईष्या करना नहीं, वह अत्यंत भाग्यशाली हैं |

जिस व्यक्ति ने प्रसंशा करना तो सीखा है परन्तु ईष्या करना नहीं, वह अत्यंत भाग्यशाली हैं |

कभी-कभी आपकी एक मुस्कान मरुस्थल में जल की बूंद की जैसी लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं |

कभी-कभी आपकी एक मुस्कान मरुस्थल में जल की बूंद की जैसी लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं |

किसी भी वस्तु की सुंदरता आपकी मूल्यांकन करने की योग्यता में छिपी हुई हैं |

किसी भी वस्तु की सुंदरता आपकी मूल्यांकन करने की योग्यता में छिपी हुई हैं |

आओ सच्ची होली हम मनायें ज्ञान पिचकारी चलायें

आओ सच्ची होली हम मनायें
आओ ज्ञान पिचकारी हम चलायें

होली अर्थात परमात्मा के संग का रंग

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Come to know the spiritual significance of Holi and Let’s celebrate the true holy.

83rd Trimurti Shiv Jayanti Mahotshaw

83rd Trimurti Shiv Jayanti Mahotshaw

Prajapita Brahmakumari Ishwariye viswa vidyalaya, dhanbad 83rd Trimurti Shiv Jayanti Mahotsaw bahut hi dhum dham se manane ja raha hai, issh subh gadi me, bhagya banane ka samay me aakar Shivratri Ke rahashya ko jane.

Shiv Baba Sath Hai toh Darne Ki Kya baat hai, aaye ham issh Shiv Jayanti Ke awsar par devi gun dharan kare aur bhagwan ke iss sthapna ke karya main madad kare.

Bhagwan Shiv aate hai hame andhkar se prakash ki aur le jate hain. Wahi Gyan, pavitrata, prem, sukh, shanti, anand aur shakti ke sager hain. Wahi ek Sadgati data hain. Wo aa gaye hai aab ham aatmao ki sadgati karne. Jisse ham itne salo se pukar rahe the, wo aab aa chuke hain. Iss Shivratri me Brahma Kumaris Dhanbad center me Jarur aaye.

Program: Sunday 3rd March 2019, Time: 5 pm

Check Out this Event Details:  https://www.facebook.com/events/546779329175473/

There are many questions which you will come to know:

  1. Why is shivratri celebrated?
  2. What is the spiritual significance of Maha Shivratri?
  3. What is the Biography of GOD Shiva?
  4. What is the difference between Shiva and Shankar?
  5. When does the GOD Come?
  6. What is the meaning of “Yada Yada Hi Dharmshya….”? and many more questions. Must attend this program.